चेन्नई। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) के अवसर पर तमिलनाडु के सामाजिक सेवा संगठन ‘उदवुम करंगल’ ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे और परिवारों से बिछड़े लोगों के प्रति संवेदनशीलता, सम्मान और जागरूकता का संदेश दिया। संगठन ने 8 अक्टूबर 2026 को चेन्नई के शांतिवनम में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें खेल-कूद, फैंसी ड्रेस और मेकअप जैसी गतिविधियों के माध्यम से लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में शांतिवनम और डिग्निटी होम्स में रहने वाले लोगों ने भाग लिया। स्नैक्स और दोपहर के भोजन की व्यवस्था लायंस क्लब ऑफ चेन्नई, डिस्ट्रिक्ट 324 1C, रीजन 5 की ओर से प्रायोजित की गई।
चार दशकों से अधिक समय से कर रहा सेवा
वर्ष 1983 में स्थापित ‘उदवुम करंगल’ के संस्थापक सचिव एस. विद्याकर के नेतृत्व में संगठन मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे बेसहारा लोगों को आश्रय, देखभाल, उपचार और समाज की मुख्यधारा से दोबारा जोड़ने के लिए काम कर रहा है। संगठन के अनुसार, अब तक 6,000 से अधिक लोगों को बचाया गया है, जबकि लगभग 5,800 लोगों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता मिली है।
संगठन के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र तमिलनाडु के चेन्नई, कोयंबटूर, तिरुवन्नामलाई और मदुरै सहित चार जिलों में सेवाएं प्रदान करते हैं। यहां ऐसे लोगों की देखभाल की जाती है, जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अपने परिवारों और घरों से दूर हो गए हैं।
कई राज्यों और देशों के लोगों को मिला सहारा
संगठन के मुताबिक, उसके पास देश के विभिन्न हिस्सों से लोग पहुंचे हैं। इनमें पंजाब, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों के लोग शामिल हैं। इसके अलावा नीदरलैंड और बांग्लादेश से जुड़े लोग भी सहायता के लिए पहुंचे हैं। कुछ लोग 17 साल या उससे अधिक समय तक अपने परिवारों से बिछड़े रहे।
देखभाल के बाद परिवारों से मिलाने की कोशिश
संगठन की प्रक्रिया में सबसे पहले जरूरतमंद व्यक्ति को सुरक्षित आश्रय, भोजन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के माध्यम से आवश्यक जांच एवं उपचार उपलब्ध कराया जाता है। स्थिति स्थिर होने के बाद सोशल वर्कर उसकी पहचान और परिवार का पता लगाने का प्रयास करते हैं। इसके लिए डिजिटल तकनीक, स्थानीय संपर्कों और विभिन्न समुदायों के नेटवर्क की मदद ली जाती है।
परिवारों से दोबारा मिलाने की यह प्रक्रिया कई बार चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन अपनों से पुनर्मिलन के क्षण संगठन के प्रयासों को सार्थक बनाते हैं।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक पहुंच रहीं मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं
वर्ष 2012 में शुरू किए गए कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम के माध्यम से संगठन ग्रामीण और आदिवासी समुदायों तक भी मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहा है। ऊटी, कूनूर और कोयंबटूर के माध्यम से संचालित इस पहल के तहत मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य जांच, काउंसलिंग, उपचार तथा स्वस्थ होने के बाद आजीविका और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। संगठन के अनुसार, इस कार्यक्रम से अब तक 2,891 लोग लाभान्वित हुए हैं।
मानसिक बीमारी के प्रति भेदभाव नहीं, संवेदनशीलता जरूरी
‘उदवुम करंगल’ का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना और बिछड़े परिवारों को दोबारा मिलाने में सहायता करना है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर यह संदेश दिया गया कि मानसिक बीमारी को कलंक या शर्म का विषय मानने के बजाय समय पर विशेषज्ञों से मदद लेनी चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों का मजाक उड़ाने या उनसे दूरी बनाने के बजाय उन्हें सहयोग देना, जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार सेवाओं से संपर्क करना और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील रहना जरूरी है।






