नर्मदापुरम: नानपा-कुल्हड़ा रोड की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सड़क निर्माण और स्थायी समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने शुक्रवार को अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्रामीण करीब 45 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और गेट के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया।
हालांकि, प्रशासन ने सड़क की मरम्मत शुरू कर दी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें नई और स्थायी सड़क चाहिए। वे कलेक्टर को ही ज्ञापन देने और लिखित जवाब लेने पर अड़े हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट नितिन टाले, डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले, एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार सुनील शर्मा, तहसीलदार सुरेखा यादव, डीएसपी संतोष मिश्रा और कोतवाली टीआई गौरव सिंह बुंदेला सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद हैं।
नानपा और कुल्हड़ा गांव सहित आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की सड़क लंबे समय से खराब है, जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने “रोड नहीं तो वोट नहीं” के नारे भी लगाए। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैरिकेडिंग के साथ पुलिस बल तैनात किया गया।
9 सितंबर से चल रहा है सड़क के लिए आंदोलन
नानपा-कुल्हड़ा सड़क संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों का आंदोलन 9 सितंबर से चल रहा है। आंदोलन के पहले दिन नानपा थाने में रात करीब 11 बजे तक धरना दिया गया। दूसरे दिन ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में बैठकर विरोध जताया।
तीसरे दिन शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने नानपा घाट पर नर्मदा पूजन किया। इसके बाद ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय के लिए पैदल मार्च शुरू किया। करीब 45 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ग्रामीण शाम करीब 7 बजे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
करीब 2 हजार ग्रामीण 4 साल से झेल रहे परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक नर्मदापुरम जिले के नानपा, कुल्हड़ा और आसपास के इलाकों को जोड़ने वाली करीब 3.26 किलोमीटर लंबी सड़क लंबे समय से खराब स्थिति में है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस मार्ग से अवैध रेत से भरे ओवरलोड डंपर और ट्रकों के लगातार गुजरने के कारण सड़क की स्थिति खराब हुई है।
बारिश के दौरान सड़क पर बने गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, मरीज, किसान और नर्मदा परिक्रमा करने वाले लोग गुजरते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो हजार लोग पिछले चार साल से इस परेशानी का सामना कर रहे हैं।
रेत परिवहन के आरोप के बीच सड़क निर्माण का काम अटका
ग्रामीणों के अनुसार नानपा-कुल्हड़ा रोड को पक्का करने के लिए ग्रामीण विकास प्राधिकरण ने प्रस्ताव तैयार कर भोपाल भेजा था। 24 दिसंबर 2025 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) के सामने इसका प्रेजेंटेशन भी किया गया था।
हालांकि, ग्रामीणों के मुताबिक जब विभागीय स्तर पर यह जानकारी सामने आई कि इस मार्ग से बंद खदानों से बिना रॉयल्टी के अवैध रेत का परिवहन होने का आरोप है, तो सड़क निर्माण की मंजूरी पर रोक लगा दी गई। विभाग की ओर से तर्क दिया गया कि जब तक अवैध वाहनों का संचालन जारी रहेगा, तब तक सड़क निर्माण का अपेक्षित लाभ नहीं होगा और सड़क दोबारा खराब हो सकती है।
ग्रामीणों की मांग- पहले अवैध रेत परिवहन पर लगे रोक
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर कार्रवाई करना पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की कार्रवाई में कमी का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि सड़क का स्थायी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए तथा सड़क को खराब करने वाले ओवरलोड और अवैध रेत परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। ग्रामीण कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर लिखित आश्वासन लेने की मांग पर अड़े हुए हैं।
मौके पर प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौजूद
प्रदर्शन के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट नितिन टाले, डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले, एसडीएम देवेंद्र प्रताप सिंह, तहसीलदार सुनील शर्मा, तहसीलदार सुरेखा यादव, डीएसपी संतोष मिश्रा और कोतवाली टीआई गौरव सिंह बुंदेला सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
ग्रामीणों का सवाल- प्रशासन की नाकामी का खामियाजा हम क्यों भुगतें?
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण और क्षेत्र की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन सड़क को नुकसान पहुंचा रहा है, तो प्रशासन को इस पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे खराब सड़क की समस्या का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन जारी रख सकते हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर क्या ठोस कदम उठाता है और नानपा-कुल्हड़ा सड़क के स्थायी निर्माण को लेकर कब तक निर्णय लिया जाता है।
नोट: खबर में शामिल आरोप और ग्रामीणों के दावे संबंधित पक्षों के कथनों पर आधारित हैं। अवैध रेत परिवहन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।






