ग्वालियर ( ब्यूरो चीफ दिव्यानंद अर्गल ) :- ग्वालियर के एल.एन.आई.पी.ई. सभागार में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649वीं जयंती के पावन अवसर पर गुरु रविदास सेवा समिति द्वारा एक गरिमामयी संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस गौरवशाली मंच पर ग्वालियर के सपूत और अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट प्रमोद धनेले को उनके अदम्य साहस और खेल जगत में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। फरवरी का वह महीना: जब ‘मन’ के संकल्प ने बदली नियति समारोह के दौरान प्रमोद की प्रेरणादायक जीवन यात्रा को साझा किया गया। फरवरी के महीने में हुए एक सड़क हादसे ने उनके जीवन को शारीरिक रूप से एक कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया था। हादसे से पहले प्रमोद का जीवन एक सामान्य युवक की तरह चल रहा था। उस कठिन समय में दुनिया को लगा कि अब राहें रुक गई हैं, लेकिन प्रमोद ने यह सिद्ध कर दिया कि “मन के हारे हार है, मन के जीते जीत”। उन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपने सपनों के आगे बौना साबित कर दिया और ‘परिवर्तन’ को ही अपनी शक्ति बनाया। उपलब्धियाँ जो बनीं मिसाल हौसलों की उड़ान भरते हुए प्रमोद ने फुटबॉल के मैदान पर नेशनल गोल्ड मेडल जीतकर ग्वालियर का नाम पूरे देश में रोशन किया। इसके साथ ही, कन्याकुमारी से कश्मीर तक की 4320 किलोमीटर की साहसिक बाइक यात्रा कर उन्होंने यह संदेश दिया कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती। मंच पर मौजूद दिग्गजों ने बढ़ाया उत्साह समारोह के मुख्य अतिथि प्रेमचंद बेरवा जी (उप मुख्यमंत्री, राजस्थान सरकार) और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे लालसिंह आर्य जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अ.जा. मोर्चा भाजपा) ने प्रमोद को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में नारायण सिंह कुशवाहा जी (कैबिनेट मंत्री, म.प्र. शासन), प्रद्युम्न सिंह तोमर जी (ऊर्जा मंत्री, म.प्र. शासन), भारत सिंह कुशवाहा जी (सांसद, ग्वालियर), भगवान सिंह परमार जी (प्रदेशाध्यक्ष, अ.जा. मोर्चा), विवेक नारायण शेजवलकर जी (पूर्व सांसद) और जय प्रकाश राजौरिया जी (जिलाध्यक्ष, भाजपा) उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने एक स्वर में प्रमोद के जज्बे को नमन किया और उन्हें आज के युवाओं का असली रोल मॉडल बताया।
सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प प्रमोद की जुबानी
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रमोद धनेले ने भावुक संदेश देते हुए कहा— “फरवरी का वह महीना मेरे जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए और शक्तिशाली ‘मैं’ का जन्म था। कल तक मैं एक साधारण जीवन जी रहा था, लेकिन आज मैं हर उस व्यक्ति के लिए एक उम्मीद बनना चाहता हूँ जो संघर्ष कर रहा है। इंसान शरीर से नहीं, मन से हारता है। आज से मेरा संकल्प है कि मैं अपनी सकारात्मक ऊर्जा से समाज में एक बड़ा बदलाव ला सकूँ। “हौसले के तर्कश में कोशिश का वो तीर जिंदा रख, हार जाए चाहे जिंदगी में सब कुछ, मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिंदा रख।”









