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Fact Check: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सनातन और इस्लाम के बीच अंतर समझने के वीडियो को एडिट कर गलत दावे से किया जा रहा वायरल

Published on: 01/26/2026
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नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। महा मेले में संगम स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद चल रहा है। इसी बीच उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्हें कलमा पढ़ने के बारे में बोलते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो को शेयर कर यूजर्स दावा कर रहे हैं कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लोगों से कलमा पढ़ने की अपील की है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। असल में शंकराचार्य  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का वायरल हो रहा वीडियो प्रयागराज विवाद से पहले का है और एडिटेड है। असली वीडियो में वो लोगों को सनातन और मुस्लिम धर्म के अंतर और उससे जुड़े रीति-रिवाजों के बारे में बता रहे हैं। वीडियो के एक भाग को एडिटेड कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

क्या हो रहा है वायरल?

इंस्टाग्राम यूजर ‘sanatani_sadhana_varshney’ ने 22 जनवरी 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है,  “लीजिए सुनिए इस मुल्ला मौलाना शंकराचार्य को , अब फैसला करें इसके समर्थन में बोलने वाले  और  अगर इतना सुनकर भी अगर समर्थन  देते है तो थू है ऐसे शंकराचार्य और उसके समर्थकों पर..इन के जैसे धर्म के ठेकेदारों के कारण ही धर्म का इतना विनाश हुआ है।”

वीडियो में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहते हुए नजर आ रहे हैं, “जो इस्लाम को अंगीकार करेगा कलमा पढ़ेगा जब उसका निधन होगा कयामत का दिन आएगा तो मोहम्मद साहब उसकी सिफारिश करके उसको बहिष्ट पर भिजवा देंगे महा सुखों पर भोग करेगा। जो कलमा नहीं पढ़ा है चाहे वो कितना ही सत्यवादी हो चाहे वो कितना ही सच्चरित्र हो चाहे कितना ही बड़ा सन्यासी हो शंकराचार्य हो मोहम्मद साहब उसकी सिफारिश नहीं करेंगे और उसको सदा सदा के लिए दोजख की नजम में झोंक दिया जाएगा इसलिए कलमा पढ़ लेना एक मोहम्मद पर और एक खुदा पर विश्वास कर लेना।”

पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल 

वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें ऐसी कोई न्यूज रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें इस बात को जिक्र हो कि उन्होंने लोगों से कलमा पढ़ने की अपील की है। 

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने असली वीडियो की तलाश करना शुरू किया। हमें वीडियो का लंबा वर्जन 16 दिसंबर 2025 को ‘Jyotirmath श्री-ज्योतिर्मठ’ नाम के फेसबुक पेज पर मिला। कैप्शन के अनुसार, “इस्लाम और सनातन धर्म में क्या अंतर है? सभी सनातनी और मुसलमान इस पर विचार जरूर करें। जय बदरीविशाल जय ज्योतिर्मठ।”

वीडियो में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बोलते हैं, “कोई भी मुसलमान हमारी बात को जो सुन रहा हो, वह नाराज न हो, क्योंकि जो सच्चाई है, वह यह बोल रहे हैं आपका जो धर्म है, वह गोल बंदी है कि हमारी गोल में आ जाओ, सब ठीक है। हमारी गोल से बाहर हो, तो तुम गलत हो। उनकी परिभाषा के अनुसार, जो इस्लाम को अंगीकार करेगा कलमा पढ़ेगा, जब उसका निधन होगा कयामत का दिन आएगा, तो मोहम्मद साहब उसकी सिफारिश करके उसको बहिश्त पर भिजवा देंगे महा सुखों पर भोग करेगा। जो कलमा नहीं पढ़ा है, चाहे वो कितना ही सत्यवादी हो चाहे वो कितना ही सच्चरित्र हो चाहे कितना ही बड़ा सन्यासी हो शंकराचार्य हो मोहम्मद साहब उसकी सिफारिश नहीं करेंगे और उसको सदा-सदा के लिए दोजख की नजम में झोंक दिया जाएगा, ये गोलबंदी नहीं तो क्या है और हमारे यहां यमराज हमारे धर्म में यमराज ये नहीं देखेंगे कि ये कौन आया, ये हमारा आया की पराया आया, वो देखेंगे कि ये जो आया है। उसके आचरण कैसे रहे हैं अगर अच्छे आचरण है, तो अच्छा फल दो अगर बुरे आचरण है, तो बुरा फल दो मुसलमान भी आएगा कलमा पढ़ा, तो वहां हमारे यमराज के सामने जब खड़ा होगा, वो ये नहीं देखेंगे कि ये तो कलमा पढ़ा हुआ है, वो ये देखेंगे कि इसका आचरण कैसा है। अगर अच्छा आचरण होगा, तो उसको भी स्वर्ग भेजा जाएगा। सुखों को भोग दिया जाएगा। आदर सम्मान किया जाएगा और अगर उसके आचरण खराब है, तो कितना ही कलमा पढ़ा हो, नरक में ले जाकर रगड़ दिया जाए। इसलिए कलमा पढ़ लेना एक मोहम्मद पर और एक खुदा पर विश्वास कर लेना, ये उनके यहां नीति है कि हमारे ये पढ़ लो, बाकी सब ठीक है। हमारे यहां नहीं हमारा न्याय का धर्म है।”

अधिक जानकारी के लिए हमने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को कवर करने वाले दैनिक जागरण के रिपोर्टर शरद द्विवेदी से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो को एडिटेड बताया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, माघ मेला में मौनी अमावस्या के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्नान करने के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उनके काफिले को रोका। इसके बाद उन्होंने और उनके समर्थकों ने प्रशासन पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का अपमान करने और शिष्यों के साथ मारपीट के आरोप लगाए हैं।

नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर 18 जनवरी 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “माघ मेला में मौनी अमावस्या स्नान के मौके पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने रोक दिया। पुलिस ने मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ होने का हवाला देते हुए शंकराचार्य को संगम तट पर जाने से रोक दिया। इसके बाद समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। इससे मेला क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। अपने शिष्यों संग मारपीट के विरोध में शंकराचार्य ने स्नान करने से मना कर दिया है।”

अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को तीन सौ से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर एक विचारधारा से जुड़ी पोस्ट को शेयर करता है। 

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कलमा पढ़ने का वायरल हो रहा वीडियो प्रयागराज विवाद से पहले का है और एडिटेड है। असली वीडियो में वो लोगों को सनातन और मुस्लिम धर्म के अंतर और उससे जुड़े रीति-रिवाजों के बारे में बता रहे हैं। वीडियो के एक भाग को एडिटेड कर गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

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