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बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है होलिका दहन, शिवाजी पब्लिक एवं बचपन इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थी हुए रंग मग्न और खेली होली

Published on: 03/03/2026
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मालनपुर : होली पर अवकाश से पहले सोमवार को शिवाजी पब्लिक एवं बचपन इंटरनेशनल स्कूल के छात्र रंगों की फुहार और उत्साह से सराबोर नजर आए। विद्यालय में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया कार्यक्रम में विद्यालय संचालक ने शिक्षकों के साथ मां सरस्वती की पूजा कर कार्यक्रम की शुरुआत की,तो वहीं होलिका दहन कर असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाया और गले मिलकर शुभकामनाएं दीं।

विद्यालय में होली के गीत गूंजे बच्चों ने पारंपरिक अंदाज में होली खेली। गुलाल उड़ाते हुए विद्यार्थियों ने आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। दोनों ही विद्यालयों के संचालक दिनेश सिंह परिहार उर्फ बंटू ने बच्चों को बताया कि होली आपसी सद्भाव और मेलजोल का पर्व है। होली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक का प्रतीक है। बच्चों ने संयमित और सुरक्षित ढंग से रंगोत्सव मनाया। होली मिलन समारोह में छात्रों ने पारंपरिक होली गीतों से माहौल को उत्सवमय बना दिया।

विद्यालय के शिक्षकों ने होली के त्यौहार को सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया और एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं और सुरक्षित व पर्यावरण अनुकूल होली मनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त शिक्षक रीटा द्विवेदी, प्रताप सिंह , नेहा शिंह, अर्जुन कुमार सुनील आदि स्टॉप सदस्य मौजूद रहे

होलिका अपने प्रेम के लिए अग्नि में हुई भस्म, होलिका की अधूरी प्रेम कथा

फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि पर होलिका दहन का त्योहार मनाया जाता है। वहीं, मान्यता है की इसी दिन कुछ ऐसा भी हुआ था की होलिका की प्रेम कथा अधूरी रह गई थी। अपने प्रिय इलोजी के प्राण बचाने के लिए होलिका अग्नि में जलकर भस्म हो गई। आइए होलिका दहन पर विस्तार से जानें होलिका और इलोजी की पौराणिक कथा।

होलिका दहन का त्योहार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है जिसे देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं, इसके अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। होलिका दहन के इस पर्व के पीछे एक पौराणिक कथा मिलती है। जो होलिका की अधूरी प्रेम कथा से जुड़ी हुई है। अपने प्रेम के खातिर ही होलिका अग्नि में भस्म हो गई थी। मान्यता है की अपने प्रेम इलोजी को बचाने के लिए होलिका अग्नि में बैठ जाती है। आइए विस्तार से जानें होलिका और इलोजी की कथा।

होलिका का इलोजी से तय हुआ था विवाह

पौराणिक कथा के अनुसार, होलिका हिरण्यकश्यप की बहन थी और हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। होलिका का विवाह इलोजी के साथ तय किया गया था और दोनों एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका का विवाह तय हुआ था। लेकिन इस पूर्णिमा के दिन कुछ ऐसा हुआ की होलिका की प्रेम कथा अधूरी रह गई। दरअसल, हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से बहुत परेशान था। उसने कई प्रयास करे ताकि प्रह्लाद विष्णुजी की भक्ति करना छोड़ दे। लेकिन प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्ति में लगा रहता था। ऐसे में कई प्रयास करने के बाद भी हिरण्यकश्यप को अपनी हर योजना में हार का सामना करना पड़ा। इसलिए हिरण्यकश्यप ने फैसला किया कि वह अपने बेटे की बलि देगा।

हिरण्यकश्यप की धमकी के आगे होलिका हुई बेबस

होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। ऐसे में हिरण्यकश्यप ने योजना बनाई और उसके बारे में होलिका को बताया। होलिका को दुशाला के साथ अपने भतीजे प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठने को कहा गया था। यह योजना सुनकर होलिका ने इंकार कर दिया की वह ऐसा न करेगी। कई बार करने पर भी होलिका ने मना कर दिया। ऐसे में हिरण्यकश्यप ने विवाह में बाधा और इलोजी को मारने की धमकी दे दी। हिरण्यकश्यप ने कहा- पहले तुम प्रह्लाद को लेकर हवन कुंड में बैठ जाओ फिर इलोजी से विवाह कर लेना। धमकी के बाद मजबूर होकर होलिका को यह बात माननी पड़ी। इसके बाद, प्रह्लाद को लेकर विवाह वाले दिन यानी पूर्णिमा तिथि पर हवन कुंड में बैठने की योजना बनाई गई। इलोजी इन सभी बातों से अंजान था और अपनी बारात लेकर वह फाल्गुन पूर्णिमा को रात में बारात लेकर निकल गया।

अग्नि में भस्म हुई होलिका, इलोजी ने खोया सुध बुध

पूर्णिमा तिथि पर होलिका दुशाला के साथ प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर हवन कुंड में बैठ गई। तभी अचानक से ऐसी हवा चली की दुशाला प्रह्लाद के पास पहुंच गई और होलिका जलकर भस्म हो गई। ऐसे में विष्णुजी के भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बाहर आ गए। वहीं, बारात लेकर पहुंचे इलोजी ने जब अपनी आंखों से सामने यह घटना होते हुए देखी तो वह उसने अपना सुधबुध खो दिया और सबकुछ छोड़कर वन में चला गया।

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