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सच्चिदानंद अर्गल का नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल में हुआ चयन, परिवार मे खुशी की लहरसच्चिदानंद अर्गल का नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट यूनिवर्सिटी भोपाल में हुआ चयन, परिवार मे खुशी की लहर

Published on: 01/07/2026
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ग्वालियर :- जब मेहनत जुनून में बदल जाए और लक्ष्य आंखों में बस जाए, तब कामयाबी खुद रास्ता बना लेती है, भिंड जिले के मेहगांव का बेटा सच्चिदानंद अर्गल ( शैलू ) ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। 12 वीं मैथ्स का छात्र रहा सच्चिदानंद अर्गल ( शैलू ) ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) में लगभग देशभर में 85 हजार छात्रों के बीच मे ऑल इंडिया रैंक-256 लाकर छोटे कस्बे का नाम रोशन कर दिया । सच्चिदानंद अर्गल ने न केवल अपने माता-पिता और विद्यालय, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है। जैसे ही कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की ओर से क्लैट परीक्षा जारी हुआ, बेटे की उपलब्धि की खबर से स्कूल और घर में खुशी की लहर दौड़ गई। देशभर से करीब लगभग 85 हजार विद्यार्थियों ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में हिस्सा लिया था। इतनी कड़ी प्रतिस्पर्धा में हासिल करना सच्चिदानंद की निरंतर मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का प्रमाण है। इस सफलता के साथ ही अब सच्चिदानंद को देश के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भोपाल में पांच वर्षीय स्नातक विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल गया है, कक्षा 12वीं मैथ्स सब्जेक्ट से श्री रामजीलाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल से उत्तीर्ण की, उसके बाद कॉमन लॉ टेस्ट की तैयारी करना शुरू दो वर्षों के अटैक प्रयासों के बाद आखिरकार सफलता हासिल हुई |

पढ़ाई के प्रति समर्पण ने बेटा सच्चिदानंद को इस मुकाम तक पहुंचाया

सच्चिदानंद अर्गल भिंड जिले के मेहगांव के निवासी हैं। परिवार का कहना है कि संस्कार, सकारात्मक वातावरण और पढ़ाई के प्रति समर्पण ने बेटा को इस मुकाम तक पहुंचाया। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और हर कोई इस बेटे की सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। सच्चिदानंद अर्गल की कहानी यह साबित करती है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने उड़ान भर सकते हैं । नियमित अध्ययन, विशेष कक्षाएं, मॉक टेस्ट और ऑनलाइन पढ़ाई से उसने तैयारी को मजबूत किया । सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखना उसकी सफलता की बड़ी वजह रही। उन्होंने कहा कि अच्छी रैंक की उम्मीद थी, सच्चिदानंद की उपलब्धि यह संदेश देती है कि संसाधनों की सीमाएं भी दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे छोटी पड़ जाती हैं। छोटे शहरों के लोग भी बड़े सपने देख सकते हैं और मेहनत व सही मार्गदर्शन से उन्हें साकार कर सकते हैं, जो सच्चिदानंद अर्गल ने कर दिखाया ।

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